Sunday, August 15, 2010

मेरा गोरखपुर शहर

जहाँ  बाबा राघव   मेडिकल कॉलेज    है
जहाँ    दीनदयाल    विश्वविद्यालय है।
जहाँ   गोरख   बाबा     का     मंदिर    है.
जो    सबके     दिलों     के    अंदर     है।
जो    कबीर     प्रेम     कि     धरती     है 
जहाँ       बुढ़िया      माई     रहती     है।
जहाँ  जनता  गोरखनाथ  की  पुजारी  है.
जहाँ  से   हारा    मनोज     तिवारी    है।
जहाँ    धर्म-संस्कृति     का    राज़     है.
जिस पर  सदा  ही  हमको  को  नाज़  है।  
जहाँ      विकास       की       लहर      है.
वहीँ      मेरा     गोरखपुर      शहर    है।



गोरखपुर विश्वविद्यालय









Tuesday, March 23, 2010

अटल बिहारी वाजपेयी


परिचय
अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म दिसंबर २५, १९२४) १९९६ तथा १९९८ से मई २००४ तक भारत के प्रधान मंत्री थे । उनका जन्म मध्य प्रदेश में ग्वालियर में हुआ था और वह जीवनभर भारतीय राजनीति में सक्रिय hain वह भारतीय जन संघ की स्थापना करने वालों में से एक है और १९६८ से १९७३ तक वह उसके अध्यक्ष भी रह चुके हैं । १९५७ में वह पहली बार भारतीय संसद में चुने गये और १९७७ में जनता पार्टी की स्थापना तक वह उसके नेता रहे । मोरारजी देसाई की सरकार में वह १९७७ से १९७९ तक विदेश मंत्री रहे । १९८० में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। १९८० में बनी भारतीय जनता पार्टी के वे पहले अध्यक्ष भी रहे । वे राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं । मेरी इक्यावन कविताएं वाजपेयी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है ।
अटल जी की पत्रकारिता
एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए वाजपेयी के लिए शुरुआती सफ़र ज़रा भी आसान न था. 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया ( अब लक्ष्मीबाई ) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई. उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया और पत्रकारिता में अपना करियर शुरु किया. उन्होंने राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया.

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

 
सत्य का संघर्ष सत्ता से
न्याय लड़ता निरंकुशता से
अंधेरे ने दी चुनौती है
किरण अंतिम अस्त होती है



दीप निष्ठा का लिये निष्कंप
वज्र टूटे या उठे भूकंप
यह बराबर का नहीं है युद्ध
हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध
हर तरह के शस्त्र से है सज्ज
और पशुबल हो उठा निर्लज्ज



किन्तु फिर भी जूझने का प्रण
अंगद ने बढ़ाया चरण
प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार
समर्पण की माँग अस्वीकार



दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

                                       KAVI-ATAL BIHARI VAJPAI

क़दम मिलाकर चलना होगा




बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
 क़दम मिलाकर चलना होगा।



हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।


उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।


सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढ़लना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।


कुछ काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
 क़दम मिलाकर चलना होगा।
                                             
                               KAVI - ATAL BIHARI VAJPAI

Wednesday, March 3, 2010

रविन्दर नाम का लड़का

        रविन्दर  नाम  का   लड़का   अब  रवि हो  गया  है   
        जो टिप -टाप कर  लिखता था अब  कवि  हो  गया है
       जो   जीरो   नम्बर  पता  था  वो   हीरो  हो   गया  है
       बाराबंकी   का   रहने   वाला   लखनवी   हो  गया है
       जो  बाबूजी   कहलाता  था   अब   डैडी  हो   गया  है
       जींस के जमाने में सलवार- कुर्ता अजनबी हो गया है
        नौटंकी  में  जो  जोकर  था  वो  रंगकर्मी  हो  गया है
        अफरा - तफरी   मचाने   वाला सनसनी  हो   गया है

        बख्तर को   वकतर  कहता था  उदघोषक हो  गया है
        एफ  को   यफ   कहता  था   संयोजक   हो   गया  है
        अखाड़े में जो लड़ता  था  और   गामा   कहलाता  था
        जिम   में    जा -    जाकर   ग्रेट  खली   हो  गया   है 

        मै भी कुछ बनूँगा क्योंकि ...................................

        रविन्दर  नाम  का  लड़का  अब  रवि  हो  गया    है
        जो टिप -टाप कर लिखता था अब कवि हो गया  है