Thursday, June 4, 2020

समृद्ध जीवन की बजाय संतुष्टिपूर्ण जीवन का आह्वाहन



भारतीय अर्थव्यवस्थाः कोविड-19 के बाद चुनौतियां व अवसर’ विषय पर वेबिनार में विशेषज्ञों ने रखे विचार

बीएचयू के प्रो.एच.पी. माथुर, पीएनबी के सुनील अग्रवाल व वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने दिया व्याख्यान

केविवि कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने की अध्यक्षता, प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार रहे संयोजक

16 मई 2020
कोविड-19 एक विश्वव्यापी संकट है। लॉकडाउन की वजह से कंपनियों में मैनुफैक्चरिंग नहीं हुई है। पहले से जो तैयार माल था उसकी बिक्री नहीं हुई। अगर सप्लाई नहीं होगी तो कोई भी कंपनी काम नहीं कर सकती है। लोगों की नौकरियां चली गयी हैं। जिनके हाथ में नौकरी है उनमें से भी बड़ी संख्या में लोगों की सैलरी कम हुई। लोग केवल जरुरी सामान खरीद रहे हैं। इससे डिमांड पर असर पड़ा है। भारत डायमंड, सीफूड, पेट्रो प्रोडक्ट, ज्वैलरी आदि चाइना को भेजता था। बाकि देशों में भी माल जाता था, वहां से भी नकारात्मक असर आया है। संकट की इस घड़ी में भी भारत के पास अवसर है। हमें शार्ट समय के लिए भी और लम्बी दौड़ के लिए भी योजना बनानी होगी। भारत में आउटसोर्सिंग हब व मैन्यूफैक्चरिंग हब तैयार करना होगा। एजुकेशन सेक्टर ऑनलाइन होने जा रहा है। डिस्टेंस एजुकेशन के क्षेत्र में बड़ा अवसर हैं। हमें परिस्थिति को समझते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उपरोक्त बातें काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रबंधन विज्ञान संस्थान के प्रो.एच.पी. माथुर ने महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रबंधन विज्ञान विभाग द्वारा ‘भारतीय अर्थव्यवस्थाः कोविड-19 के बाद चुनौतियां व अवसर’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कही।

इससे पूर्व केविवि कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रबंधन विज्ञान विभाग द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार वेबिनार आयोजित करने की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह स्वयं विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इन आयोजनों के कारण उन्हें भी कुछ नया जानने-सुनने का अवसर मिलता है। कोरोना संकट के बीच उद्योगों के भारत आने की संभावना पर सवालिया अंदाज में कहा कि यह एक गंभीर विषय है। हमें सोचना पड़ेगा कि इसका उल्लास मनाना है या सचेत रहने आवश्यकता है? अपने संक्षिप्त संबोधन के अंत में उन्होंने वेबिनार के सभी सहभागियों का स्वागत करते हुए उन्होंने सभी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं दी।

पंजाब नेशनल बैंक, नई दिल्ली के मुख्य प्रशिक्षण अधिकारी सुनील अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि निश्चित तौर पर संकट बड़ा है। इस समय हमें संभलकर आगे बढ़ना है। हमारी अर्थव्यवस्था बिल्कुल कमजोर नहीं हुई है, धीमी हो गयी है। सरकार द्वारा टैक्स कलेक्शन अचानक से कम हो गये हैं, खर्चे बढ़ गये हैं। हम ‘जान है तो जहान है’ से ’जान भी जहान भी’ पर आ गये हैं। इसके बाद अब जिम्मेदारी उद्योग जगत पर आ गयी है। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना से आने वाले समय में लोगों को लाभ मिल सकता है। हमारी समस्या पापुलेशन मैनेजमेंट का न होना भी है। एक राज्य के लोग दूसरे राज्य में कितनी संख्या में हैं, क्या कर रहे हैं? इस संबंध में डेटा की आवश्यकता है। लोगों के रोजगार छूट गये हैं। लोगों के पास पैसा नहीं होगा तो खर्च नहीं करेंगे। डिमांड नहीं होगी तो प्रोडक्शन नहीं होगा। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार ने 20 लाख करोड़ का पैकेज दिया है। बैंकर्स को इसे समझना होगा। जनता तक लोन पहुंचेगा तो लिक्विडिटी बढ़ेगी। शहरों से लोग गांवों में जा रहे हैं। गांवों में विकास और डिजिटलाईज करने की आवश्यकता है। वक्त की मांग है कि हम समृद्ध जीवन की बजाय संतुष्टिपूर्ण व्यवस्था की ओर जाएं।

द हिंदू बिजनेस लाइन के वरिष्ठ सहायक संपादक शिशिर सिन्हा ने अपने वक्तव्य में कहा कि राज्य सरकारों के सामने सवाल है कि संसाधन कहां से आएगा। उनके जिम्मे कुछ खर्च ऐसे होते हैं, जिन्हें वे रोक नहीं सकते। ऐसे में शराब बिक्री से पैसा अर्जित करना एक विकल्प है। कई राज्यों में शराब की बिक्री शुरु हुई तो सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ गईं। होम डिलिवरी बेहतर विकल्प नज़र आया। राज्य सरकारों के ऊपर जब अतिरिक्त कमाई की बात आएगी तो शराब की ओर जा सकते हैं।
वेबिनार के संयोजक व प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.पवनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि सहभागियों की तरफ से पूछे गये सवालों की संख्या बता रही है कि वक्ताओं का व्याख्यान अत्यंत ज्ञानप्रद था और लोगों ने बहुत ध्यान से सुना। उन्होंने अत्यंत ही कम समय की सूचना के बावजूद सहजता से वेबिनार में सहभागी होने के लिए सभी वक्ताओं का आभार जताया। प्रबंधन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर व वेबिनार की आयोजन सचिव डॉ. स्वाति कुमारी ने कार्यक्रम का संचालन किया। आयोजन सचिव डॉ. अल्का लल्हाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्रो. सुधीर कुमार साहू, सह-संयोजक रहे जबकि सह प्रोफेसर डॉ.सपना सुगंधा ने आयोजन सचिव का दायित्व निभाया। केविवि के प्रो.राजीव कुमार, कमलेश कुमार, डॉ.दिनेश व्यास, डॉ.ओमप्रकाश गुप्ता, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य कुमार मिश्रा आदि शिक्षक व बड़ी संख्या में विद्यार्थी ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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