Sunday, August 16, 2020

पूर्व छात्र संघ, जेएनयू और केविवि-मोतिहारी, हिमाचल प्रदेश केविवि, हिंदी विवि, वर्धा, उड़ीसा केविवि व केविवि गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन

भारतीय ज्ञान के आगे खड़ी ब्रिटिश शिक्षा नीति की दीवारों को गिराएगी नई शिक्षा नीति-प्रो. केसी अग्निहोत्री

प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. कुलदीप चन्द्र अग्निहोत्री, प्रो. संजीव कुमार शर्मा समेत अन्य कुलपति, रजिस्ट्रार व जाने-माने शिक्षाविदों ने रखे विचार


(15 अगस्त, 2020)


भारत में 185 साल से जो शिक्षा नीति चली आ रही थी, उसमें उद्देश्य था कि भारतीयों को मानसिक रुप से गुलाम बनाना है। पुराने नीति निर्माताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे अपने उद्देश्य में एकदम सफल रहे। मैं हैरान हूं कि उन्होंने एक भी कॉमा या फुल स्टॉप की गड़बड़ी नहीं की। अब तक जो व्यवस्था चलाते रहे वे मानते हैं कि हिंदुस्तान का ज्ञान-विज्ञान किसी काम का ही नहीं है, सब यूरोप का है। नई शिक्षा नीति के बारे में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति यह मानकर चलती है कि हिंदुस्तान में इतनी ऊर्जा, मेधा और अवसर हैं कि इनका ठीक प्रकार से सदुपयोग कर लिया जाए तो भारत बहुत आगे जा सकता है। हमारा जितना सदियों का ज्ञान है उसके आगे ब्रिटिश शिक्षा नीति ने दीवारें खड़ी की हैं, उन दीवारों को नई शिक्षा नीति हटाएगी। ये बातें हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने पूर्व छात्र संघ, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और केविवि-मोतिहारी, हिमाचल प्रदेश केविवि, हिंदी विवि, वर्धा, उड़ीसा केविवि व केविवि गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार में कही।


“आत्म निर्भर भारत के लिए नई शिक्षा नीति-2020 के आलोक में ज्ञानयुक्त समाज का निर्माण” विषय पर आयोजित इस वेबिनार की शुरुआत राष्ट्रीय गीत और सरस्वती वंदना के साथ हुई। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. महीप ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद कार्यक्रम के सचिव व पूर्व छात्र संघ, जेएनयू के महासचिव डॉ. धीरज कुमार सिंह ने अपना वक्तव्य दिया। इसके पश्चात पूर्व छात्र संघ, जेएनयू के अध्यक्ष राजेश कुमार ने सभी विद्वानों एवं विषय का परिचय देते हुए अपनी बात रखी। जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रमोद कुमार ने उद्घाटन वक्तव्य दिया। प्रारुप नई शिक्षा नीति, समिति के सदस्य प्रो. एम.के. श्रीधर ने बीज वक्तव्य दिया।


महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने नई शिक्षा नीति के बारे में अपने संबोधन में कहा कि इसका प्रारुप पहले ही आ गया था और जुलाई-2020 में भी विवि में इस विषय पर कार्यक्रम हुआ था। आज जो लोग इससे जुड़े हैं उनमें से कुछ लोग पहले भी कार्यक्रम से जुड़े थे। जो नई शिक्षा नीति आई है आज यह सही मायने में भारतीय है। यह भारतीय भाषाओं के सम्मान को बढ़ाती है। भारतीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकों का निर्माण करना, उपलब्ध सामग्री का अनुवाद कराना, विद्यार्थियों तक पहुंचाना आदि योजनाएं केवल सरकार की नहीं है बल्कि शैक्षणिक जगत के जुड़े हम सभी लोगों का भी काम है। कार्ययोजना हमें बनानी होगी। नई शिक्षा नीति के खिलाफ भ्रांतियों का सामना करने के लिए प्रो. शर्मा ने जनसम्पर्क, जनसंचार और जनसंवाद को जरुरी बताया।


महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने अपने संवोधन में पूर्व वक्ता कुलपति प्रो. शर्मा की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि यह भारतीय शिक्षा नीति है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति है। सच्चाई यह है कि यह 185 वर्षों बाद आई शिक्षा नीति है। यह 34 वर्षों बाद आई शिक्षा नीति है, इस रुप में इसे समझने आवश्यकता नहीं है। 1835 में जो शिक्षा नीति आई थी, उस शिक्षा नीति का 1992 में एक्सटेंशन मात्र हुआ है। 1968 में कोठारी ने जरुर कोशिश की थी कि गाड़ी को पटरी पर लाया जाए। लेकिन उनकी बातें केवल सुभाषित होकर रह गयीं। अब पहली बार ऐसी शिक्षा नीति आई है जिसमें सभी भारतीय भाषाओं के लिए समान अवसर प्राप्त होता है और वास्तविक संदर्भों में भारत की बहुभाषिकता को ताकत के रुप में मानते हुए प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति बहुभाषिक हो, यह इसकी दिशा में प्रस्ताव प्रस्तुत करता है। पहली बार भारत केंद्रित शिक्षा प्रणाली है।


केंद्रीय विश्वविद्यालय, उड़ीसा के कुलपति प्रो. आई. ब्रम्ह्मम ने नई शिक्षा नीति की प्रशंसा करते हुए इसे भारत की आवश्यकता के अनुरुप बताया। वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व जाने-माने शिक्षाविद श्रीनिवासजी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जेएनयू के पूर्व छात्रों ने इस जरुरी विषय को चुना है, इसका बहुत महत्व है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से हम लोग 185 वर्षों बाद अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। भारत में शिक्षा, मनुष्य को मनुष्य बनाने पर बल देता है, जिसे विवेकानंद जी ने मनुष्य के आंतरिक शक्तियों को जागृत करने की बात कही है। यह 

आवश्यक है कि भारत के युवा भारत को तो समझें, तभी हम विश्व में अपना स्थान बनाएंगे।

 

अध्यक्षीय संबोधन में केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के कुलपति प्रो. रमा शंकर दूबे ने पूर्व छात्र संघ, जेएनयू को इस महत्वपूर्ण विषय पर जाने-माने विद्वानों को आमंत्रित कर विमर्श कराने के लिए धन्यवाद दिया। अपने पूर्व वक्ताओं की बातों को क्रम से रखते हुए उन्होंने सहमति जताते हुए नई शिक्षा में निहित प्रमुख बिंदुओं की चर्चा की। भारत को चाणक्य, आर्यभट्ट, सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन और महामना मदन मोहन मालवीय का देश बताते हुए अपनी भारतीयता, ज्ञान-विज्ञान पर गर्व करने की बात कही।

महात्मा गांधी केन्द्रीय विवि के प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने कार्यक्रम के निष्कर्ष को बताते हुए कहा आज बौद्धिक जनों ने जो मंथन किया वह भारत के कल का निर्माण होगा और इससे जो अमृत निकलेगा, उससे हम सभी लाभान्वित होंगे। कार्यक्रम का संचालन केन्द्रीय विवि, गुजरात के डॉ. अतानु महापात्रा ने किया। इस अवसर पर केविवि की डॉ. सपना सुगंधा, डॉ. दिनेश व्यास, डॉ. स्वाति कुमारी, कमलेश कुमार समेत देश के कई विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी व शिक्षाविद उपस्थित रहे।

केविवि में उच्च शिक्षा का संचालन, पुनर्गठन तथा क्रियान्वयन की रुपरेखा पर हुई चर्चा

 *राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की कार्ययोजना विषय पर ई-कार्यशाला*

*कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की अध्यक्षता, प्रो. मनोज दीक्षित, प्रो. स्मृति कुमार सरकार, प्रो.एडीएन वाजपेयी आदि वक्ताओं ने रखे विचार*

(6 अगस्त, 2020)

महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की कार्ययोजना के क्रियान्वयन की रुपरेखा, संचालन तथा उच्च शिक्षा के पुनर्गठन से संबंधित विचार-विमर्श हेतु एक दिवसीय आभासी ई-कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की। कार्यक्रम के शुरुआत में कुलपति प्रो. शर्मा ने उन सभी वक्ताओं का अभिनंदन किया जिन्होंने अल्पावधि सूचना के बावजूद इस महत्वपूर्ण ई-कार्यशाला हेतु अपने व्यस्ततम समय में से कुछ अवकाश निकाला। इसके पश्चात शिक्षा अध्ययन संकाय के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के सभापति, प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने सभी वक्ताओं का परिचय दिया। विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. जी.गोपाल रेड्डी ने औपचारिक रुप से सभी वक्ताओं का स्वागत किया गया। सभापति प्रो. श्रीवास्तव ने ई-कार्यशाला के विषय का परिचय देते हुए सत्रारंभ किया।

डॉ.आरएमएल विवि,अयोध्या के पूर्व कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरासत से प्राप्त पुरातन एवं कठोर शिक्षा व्यवस्था से दूर हटते हुए अधिक लचीला तथा सभी को एक साथ लाने वाली पश्चिमी व्यवस्था को अपनाने की आवश्यकता है। वर्धमान विवि, पश्चिम बंगाल के पूर्व कुलपति प्रो. स्मृति कुमार सरकार ने अपने संबोधन में कहा कि कार्यान्वयन में जल्दबाजी किए बिना धैर्य का परिचय दें। नई शिक्षा नीति के पूर्ण कार्यान्वयन से पहले इसको समझने हेतु पर्याप्त समय एवं दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी एवं इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना आवश्यक होगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिष्ठित तथा नव स्थापित विश्वविद्यालय में विलय के लिए नीतिगत रुपरेखा का निर्माण होना चाहिए। यह स्थापित विश्वविद्यालय के समय परिक्षणित मूल्य प्रणाली के माध्यम से नव स्थापित संस्थानों के अपेक्षित परामर्श को सुनिश्चित करेगा। यूपी स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एडूकेशन के अध्यक्ष एवं बीएचयू, वाराणसी के पूर्व कुलपति, प्रो. गिरीष चंद्र त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति लागू करने से पहले इसका गहन अध्ययन एवं समझ को विकसित करना होगा। एनईपी को लागू करने की बात तभी की जानी चाहिए जब इसके सभी प्रावधानों को समझा गया हो एवं सभी हितधारकों को इसके बारे में समझाया गया हो।

गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बंसवार राजस्थान के पूर्व कुलपति प्रो, कैलाश सोडाणी ने अपने संबोधन में कहा कि संघ लोक सेवा आयोग की तरह अध्यापकों का चयन करना होगा जिससे कि प्रक्रियाओं में अंतर्निहित कमियों से बचा जा सके। इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.नागेश्वर राव ने अपने संबोधन में कहा कि एनईपी के नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु विश्वविद्यालयों को समयबद्ध तरीके से अपने संविधि, अध्यादेशों में परिवर्तन करना होगा। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई के पूर्व कुलपति प्रो. राम मोहन पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति के सभी नीतियों को समझाने हेतु सभी राज्य सरकारों से संपर्क स्थापित किया जाना चाहिए। इससे सर्वश्रेष्ठ परिणामों को प्राप्त किया जा सकेगा। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति प्रो. जी.डी.शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि दोहराव से बचने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर संविधि, अध्यादेशों की निर्माण किया जाना चाहिए।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने समापन सत्र की अध्यक्षता की। विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी प्रकोष्ठ के समन्वयक, प्रो. आनन्द प्रकाश ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया।

शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उम्मीद जगाती नई शिक्षा नीति-2020


                

(प्रो.पवनेश कुमार, म.गां.के.विवि, मोतिहारी)

नई शिक्षा नीति की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। चीन से सीमा विवाद, विश्व-व्यापी कोरोना संकट और सरकार द्वारा घोषित आत्म निर्भर भारत योजना पर तमाम कॉलेजों- विश्वविद्यालयों और बौद्धिक संस्थाओं द्वारा पिछले कुछ समय से लगातार वेबिनार आयोजित हुए और ये सिलसिला अभी भी चल ही रहा है। इस बीच नई शिक्षा नीति के आ जाने से बौद्धिक वर्ग को विमर्श का एक नया विषय भी मिल गया है। इस विषय पर विचार-विमर्श इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि इससे देश के बच्चों और युवाओं का भविष्य तय होने वाला है।


नई शिक्षा नीति के सार्वजनिक होते ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल दिया गया है। अब इसे शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। 1986 के बाद 34 साल के अंतराल पर देश की शिक्षा नीति में यह बदलाव किया जा रहा है जिसे नई शिक्षा नीति-2020 के नाम से जाना जा रहा है। देश में पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या बहुत बड़ी है किंतु इनमें से डिग्रीधारी युवा ही अधिक हैं और रोजगार का तकनीकि कौशल बहुत कम युवाओं के पास है। ऐसी शिकायतें भारत में कार्यरत कम्पनियों की तरफ से भी समय-समय पर आती रहती है। आगे से ऐसी शिकायतें कम हो जाने की उम्मीद है क्योंकि अब छठी कक्षा से ही बच्चों को प्रोफेशनल और स्किल शिक्षा दिये जाने की बात नयी शिक्षा नीति में शामिल है। भारत की जीडीपी का 6% भाग शिक्षा के लिए खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

अभी हिंदुस्तान में स्कूली शिक्षा 10+2 के ढांचे में चल रही है जिसे बदलकर 5+3+3+4 के फॉर्मेट में किया गया है। बच्चों के स्कूली शिक्षा के 15 वर्षों को 4 भागों में विभाजित किया गया है। पहले 5 साल में प्री-स्कूलिंग या आंगनवाड़ी के 3 साल और  कक्षा 2 तक की पढ़ाई होगी। अगले 3 वर्षों में तीसरी कक्षा से 5वीं कक्षा तक की पढ़ाई। उसके बाद 3 साल छठी से लेकर 8वीं तक की पढ़ाई  और अगले 4 साल 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई। शिक्षा तंत्र द्वारा 3 से 6 साल की उम्र के बच्चों के लिए अलग पाठ्यक्रम बनाएगी जिसमें खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों को ज्यादा स्थान मिलेगा। कज्ञा 1 से कक्षा 3 तक के बच्चों की बुनियादी शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। 9 साल तक के बच्चों की साक्षरता और संख्या ज्ञान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। बच्चों को कक्षा 6 से विषयों से परिचय करवाया जाएगा। 9वीं के बाद साईंस, आर्ट और कॉमर्स स्ट्रीम की पढ़ाई अब नहीं होगी, विद्यार्थी अपनी मर्जी से विषय चुन सकेंगे। नई शिक्षा नीति में एक नई चीज देखने को मिलेगी ये है व्यावसायिक शिक्षा। नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 6 से ही बच्चों की व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ कर दी जाएगी। जिसमें स्थानीय शिल्प और व्यापार के बारे में बताया जाएगा और उसे लोकल क्राफ्ट और ट्रेड में इंटर्नशिप का भी अवसर दिया जाएगा।


बच्चों में बोर्ड की परीक्षाओं का दबाव कम करने का उपाय नई शिक्षा नीति में शामिल है। साल में दो बार परीक्षाएं होंगी। अब रटकर समझने की बजाय समझने पर ज्यादा ज़ोर दिया जाएगा। बोर्ड परीक्षाओं को दो भागों में बांटा गया है जिसमें ऑब्जेक्टिव और डिस्क्रिप्टिव दो तरह की परीक्षाओं का प्रावधान किया गया है। अंग्रेजी का हौव्वा कम करने के उद्देश्य से नई शिक्षा नीति में मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में सीखने पर ज्यादा ज़ोर दिया गया है। इसके लिए कहा गया है कि जहां तक संभव हो 5वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में ही पढ़ाया जाए। अगर संभव हो तो 8वीं कक्षा तक यही प्रक्रिया अपनाई जाए। इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है कि लोगों की मातृभाषाएं या क्षेत्रीय भाषाएं तभी जिंदा रहेंगी जब वहां का क्षेत्रीय व्यक्ति उसे पढ़ेगा, बोलेगा और सीखेगा। वहीं इस नई नीति की आलोचना भी हो रही है। सरकार के लगभग हर कदम में मीन-मेख निकालने वाली कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता खुशबू सुंदर ने भी नई शिक्षा नीति का स्वागत किया है। इतना ही नहीं अपनी पार्टी की कार्य संस्कृति को देखते हुए उन्होंने पार्टी से अलग राय रखने पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी भी मांग ली है। जबकि दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि यह पॉलिसी सरकारी स्कूलों में सुधार लाने की अपनी जिम्मेदारी से भागने जैसी है। इसमें सरकारी स्कूल को सुधारने की बजाय प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देती नज़र आ रही है।


वहीं उच्च शिक्षा में सबसे बड़ा परिवर्तन ये है कि अगर किसी वजह से पढ़ाई बीच में छूट गयी तो साल बर्बाद नहीं होंगे। किसी विद्यार्थी ने बैचलर कोर्स अगर एक साल पूरा करने के बाद किन्हीं कारणों छोड़ दिया तो उसे सर्टिफिकेट मिलेगा। 2 साल पूरा करने के बाद छूट गया तो डिप्लोमा मिल जाएगा और तीन साल सफलता पूर्वक पूरा कर लेने पर बैचलर डिग्री दी जाएगी। जिन्हें नौकरी करनी है उनके लिए 3 साल की ही डिग्री दी जाएगी जबकि शोध के क्षेत्र में जाने वाले विद्यार्थी को 4 साल की डिग्री प्रोग्राम करनी पड़ेगी। इन 4 सालों के बाद मात्र एक वर्ष का एम.ए. और फिर सीधे पीएचडी में दाखिला ले सकते हैं। तकनीकि संस्थानों में भी अब कला एवं मानविकी के विषय पढ़ाए जाएंगे। प्रवेश के लिए एक कॉमन प्रवेश परीक्षा होगी। नई शिक्षा नीति में किताबी ज्ञान की बजाय इसके व्यावहारिक पक्ष पर ज़ोर दिया जाएगा। उच्च शिक्षा में मुख्य फोकस शोध और नवाचार पर रखा गया है इसके लिए एक नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाए जाने की बात कही गयी है। दुनिया के बड़े विश्वविद्यालय भारत में अब अपना कैम्पस खोल सकेंगे।


नई शिक्षा नीति के तहत वर्ष 2022 तक सभी विद्यालयों में निर्धारित मानकों के आधार पर आवश्यक सुविधाए व सीखने का वातावरण बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। जिसमें सभी स्कूलों में बिजली की सुविधा, कम्प्यूटर और इंटरनेट, अलग काबिलियत रखने वाले विद्यार्थियों की सहायता के लिए मूलभूत व्यवस्थाएं और सामग्री शामिल की जाएगी। स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को देने के अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि शिक्षक अपना पूरा समय शिक्षण कार्य को करने और उसमें निपूणता लाने में बिता सकें। चुनाव ड्यूटी और कुछ आवश्यक सर्वे के अलावा किसी अन्य गैर शिक्षण गतिविधि जैसे मिड डे मील बनाना, टीकाकरण अभियान, स्कूल में सामग्री की खरीददारी या कोई अन्य समय लेने वाला प्रशासनिक कार्य न करना पड़े। गैर शिक्षण कार्य के लिए स्टाफ नियुक्त किया जाएगा। 

उत्कृष्ट विद्यार्थियों को शिक्षण पेशे में प्रवेश करने को प्रोत्साहित करने के लिए मेरिट आधारित छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाएगी जिससे वे देश भर के महाविद्यालयों में एक बेहतरीन 4 वर्षीय एकीकृत बी.एड कार्यक्रम में पढ़ सकेंगे। इस तरह की छात्रवृत्ति के निधिकरण और स्थापना के लिए सरकार, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और परोपकारी संगठनों में सहभागिता की जाएगी। यह छात्रवृत्तियां मुख्य रुप से सुविधा से वंचित विद्यार्थियों के लिए होंगी। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को सख्त और पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे समाज में शिक्षकों के पेशे के प्रति भरोसा और सम्मान पैदा होगा जिससे शिक्षकों में आत्मविश्वास आएगा।

Monday, August 3, 2020

गीता पढ़ना, सुनना और मनन करना सौभाग्य की बात- प्रभु नारायण


केविवि में वर्तमान परिदृश्य में गीता की प्रासंगिकताविषय पर वेबिनार 



 
कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा रहे संरक्षक, प्रो. पवनेश कुमार ने की अध्यक्षता

 

महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्याल के प्रबंधन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में शनिवार को ई-विद्या व्याख्यान श्रृंखला के तहत वर्तमान परिदृश्य में गीता की प्रासंगिकताविषय पर एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया। महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, आरएसएस, अवध प्रांत के संचालक व वेबिनार के मुख्य वक्ता प्रभु नारायणजी ने अपने संबोधन की शुरुआत वेदव्यास द्वारा महाभारत में गीता का वर्णन करने के उपरांत कहे गये श्लोक गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः। या स्वयं पद्यनाभस्य मुखपद्याद्विनिः सृताः।। से किया। इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि गीता सुगीता करने योग्य है अर्थात श्री गीता जी को भली प्रकार पढ़कर अर्थ और भावसहित अन्तःकरण में धारण कर लेना मुख्य कर्तव्य है, जो कि स्वयं पद्यनाभ भगवान् श्री विष्णु के मुखारविन्द से निकली हुई है; अन्य शास्त्रों के विस्तार से क्या प्रयोजन है!’ उन्होंने गीता के महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि गीता पढ़ना, सुनना और उस पर मनन करने का सौभाग्य सभी को नहीं मिलता। गीता की तुलना किसी धर्मग्रंथ से नहीं हो सकती है। दुनिया मानती है कि सबसे प्राचीन जो ग्रंथ है वह ऋग्वेद है। जिन वचनों का हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले प्रादुर्भाव किया, वही वसुधैव कुटुम्बकम के रुप में आज प्रचलित है। गीता पर केंद्रित वेबिनार कराने पर विवि प्रशासन की प्रशंसा करते हुए विद्यार्थियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि प्रो. संजीव कुमार शर्मा जैसे कुलपति, प्रो. पवनेश कुमार जैसे संगठनकर्ता और डॉ. अल्का लल्हाल जैसी सहायक प्राध्यापक और संचालक विश्वविद्यालय को मिले हैं और यह महत्वपूर्ण व्याख्यान आयोजित किया जा रहा है। आगे कहा कि गीता के प्रति मैं आपके अंदर भूख पैदा कर सकता हूं, प्यास पैदा कर सकता हूं, अगर आपके अंदर गीता के प्रति जिज्ञासा जग गई तो मैं इस व्याख्यान को सफल समझूंगा।

 

विश्वविद्यालय के कुलपति व वेबिनार के संरक्षक प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में गीता के बारे में बहुत ही विस्तार से एवं सरल शब्दों में बताते हुए कहा कि गीता को उपनिषदों के सार के रुप में देखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो महाभारत में नहीं है, वह भारत में नही है। मैं इसे प्रश्नोत्तर के रुप में देखता हूं। गीता को लेकर जनमानस में व्याप्त आस्था पर कहा कि जब कोई घटना हो जाती है तो गीता के इस श्लोक को ही याद किया जाता है- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।। अर्थात इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता। प्रो. शर्मा ने ज्ञान योग के अध्याय को पाठ्यक्रमों में शामिल करने की बात कही।

 

इससे पूर्व वाणिज्य एवं प्रबंधन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता व वेबिनार के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने अपने संबोधन में गीता पर केंद्रित व्याख्यान आयोजित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और सहर्ष अनुमति के लिए विवि के कुलपति प्रो. शर्मा के प्रति आभार जताया। मुख्य वक्ता के बारे में कहा कि श्री प्रभु नारायण जी उ.प्र. सरकार से चीफ इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत के संचालक के साथ-साथ महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। इनका गीता पर गहरा अध्ययन है और इन्होंने अनेक स्थानों पर गीता पर व्याख्यान दिया है। प्रो. पवनेश ने व्याख्यान में उपस्थित महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय महासचिव हरिशंकर सिंह, चंडीगढ़ इकाई के महासचिव समेत सभी, शिक्षकों, अधिकारियों, विद्यार्थियों एवं अन्य सहभागियों का स्वागत किया एवं आभार भी जताया।

 

व्याख्यान का संचालन प्रबंधन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अल्का लल्हाल ने किया जबकि प्रबंधन विज्ञान विभाग के पीएचडी शोधार्थी चंदन वीर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर केविवि के प्रो. सुधीर कुमार साहू, डॉ. सपना सुगंधा, डॉ. शिरिष मिश्रा, डॉ. स्वाति कुमारी, डॉ. दिनेश व्यास, कमलेश कुमार, डॉ.परमात्मा मिश्रा, डॉ.पाथलोथ ओंकार, डॉ.भवनाथ पाण्डेय, पीआरओ शेफालिका मिश्रा, सिस्टम एनालिस्ट दीपक दीनकर, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य मिश्रा समेत बड़ी संख्या शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी व देश के विभिन्न विवि के विद्वान ऑनलाइन उपस्थित रहे।


आत्म गौरव जागृत करने का नाम है ‘आत्म निर्भर भारत’-श्रीनिवासजी

केविवि और शोध-बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ राष्ट्रीय वेबिनार


श्रीनिवासजी रहे मुख्य अतिथि, डॉ. धीरज कुमार सिंह मुख्य वक्ता, व प्रो. सुधीर प्रताप सिंह रहे विशेष वक्ता*

 

कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की अध्यक्षता, प्रो. पवनेश कुमार रहे संयोजक, शोध-बिहार के गौरव रंजन ने संभाला आयोजन सचिव का दायित्व

 

देश आज कई मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लड़ रहा है। कोरोना संकट से कम से कम जन हानि हो, देशवासियों का विश्वास किसी भी प्रकार कम न हो इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर लड़ाई लड़ी जा रही है। यह वह देश है जहां शरीर पर एक धोती लपेटकर, लाठी लेकर चलने वाले महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नेतृत्व किया। उन्होंने केवल स्वतंत्रता की बात नहीं की बल्कि राम राज्य और ग्राम स्वराज की भी बात की थी। आज कोरोना संकट में वही बातें हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। ये बातें सामाजिक चिंतक श्रीनिवासजी ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय और मानवता के समग्र विकास के लिए छात्रसंगठन (शोध), बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आत्मनिर्भर भारत के उभरते परिदृश्य में ग्रामीण विकासविषय पर आयोजित वेबिनार में कही। आत्म निर्भर भारत अभियान के संबंध में चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी के प्रतिक्रिया में अथवा किसी देश को पीछे करने के लिए भी नहीं बल्कि आत्म निर्भर भारतप्रत्येक भारतवासी के आत्म गौरव को जागृत करने का नाम है। सबके लिए रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और दवाई का प्रबंध होने की बात करते हुए कहा कि जब तक हम दत्तोपंत ठेंगड़ी के भारत की अवधारणा नहीं समझेंगे तब तक भारत का विकास नहीं कर सकेंगे।

 

इससे पूर्व जीआरसी इंडिया के प्रबंधन निदेशक डॉ. धीरज कुमार सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता अपने संबोधन में कहा कि जनमानस में आत्म निर्भर भारतअभियान को लेकर एक विशिष्ट वातावरण निर्मित हो रहा है। इससे देश में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जो विकास होगा उससे प्रत्येक भारतीय के जीवन में गुणवत्ता आएगी। हमारे उत्पादों की मात्रा ही नहीं बढ़ेगी बल्कि उनमें गुणवत्ता भी आएगी। लोकल के लिए वोकल होने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे कई प्रकार से विकास एक साथ नज़र आएंगे। आधारभूत संरचना का निर्माण होगा, सड़कें बनेंगी, रोजगार की स्थिति अच्छी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और अशिक्षा की स्थिति सुधरेगी। प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। यह हमारे कुल जीडीपी का 10 प्रतिशत है। आज हमें मिल-जुलकर इसका लाभ उठाने की आवश्यकता है। डिमांड और सप्लाई चैन को संतुलित करने की जरुरत है। गांधी जी, एपीजे अब्दुल कलाम और नानाजी देशमुख जैसे महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलते हुए हम अपने ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करते हुए सम्पूर्ण देश का विकास कर सकते हैं। विश्वविद्यालयों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि स्नातक स्तर से ही विद्यार्थियों में उद्यमिता के प्रति उत्सुकता पैदा करना, बिजनेस प्लानिंग सीखाना, उद्यमिता का प्रचार करना आवश्यक है।

 

वहीं जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, डॉ सुधीर प्रताप सिंह ने बतौर विशिष्ट अतिथि अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण विकास सदैव ही महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है लेकिन आज इसकी जरुरत कुछ ज्यादा ही है। आत्म निर्भर भारत योजना का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश में काम काज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए और अपनी अधिकतम चीजों के लिए हम खुद पर निर्भर हों। इसके लिए स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। आगे कहा कि आत्म निर्भर भारत का मतलब आत्मकेंद्रित होना नहीं है, बल्कि यह समाज केंद्रित योजना है। इसके लिए तमाम जटिलताओं को सरल किया जा रहा है। लघु उद्योगों की परिभाषा नये सिरे से तय की गयी है। कोरोना एक विश्वव्यापी संकट है इसे अवसर में कैसा बदला जाए, इस दिशा में काम हो रहा है। सरकार ने योजना बनाई है कि जो लोग गांव की ओर माइग्रेट होकर आए हैं उनका उपयोग ग्रामीण विकास के कार्यों में हो। मनरेगा में सरकार ने बड़े पैमाने पर अतिरिक्त पैसा लगाया है।

 

अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने इस महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित वेबिनार में बड़ी संख्या में देश के तमाम राज्यों से लोगों के जुड़ने पर प्रसन्नता जताई। सभी वक्ताओं एवं सहभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि विवि. में इस तरह के बौद्धिक आयोजन लगातार हो रहे हैं। ई-ज्ञान सीरिज आयोजित हुए। विभिन्न विभागों द्वारा 50 से अधिक वेबिनार कराए जा चुके हैं। विषय पर केंद्रित होते हुए कहा कि आत्म निर्भरता का मतलब दुनिया भर में जो कुछ अच्छा है, शुभ है वह हम तक आ जाए और मेरे पास जो अच्छा  है वह पूरे विश्व में फैल जाए, सब सुखी हों। भारतीय संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि जो मेरे-आपके लोकाचार, शिष्टाचार के विषय थे, कोरोना काल में अब विश्व के लिए वह ग्राह्य हो गये हैं।

 

वेबिनार के संयोजक एवं केविवि के वाणिज्य एवं प्रबंधन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. पवनेश कुमार ने इस सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.शर्मा का आभार जताया। वेबिनार से जुड़े विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के सहयोग के लिए सराहना करते हुए अन्य सहभागियों के प्रति भी आभार ज्ञापित किया और आगे भी ऐसे वेबिनार आयोजित करने की बात कही। वेबिनार के आयोजन सचिव व मानवता के समग्र विकास के लिए छात्रसंगठन (शोध), बिहार के राज्य संयोजक गौरव रंजन ने सभी वक्ताओं एवं अतिथियों का संक्षिप्त परिचय देते हुए स्वागत किया एवं बड़ी संख्या में जुड़े सहभागियों का भी स्वागत किया।

 

प्रबंधन विज्ञान विभाग के शोधार्थी चंदनवीर ने वेबिनार का संचालन किया। वेबिनार में केविवि के प्रो. राजीव कुमार, प्रो. सुधीर कुमार साहू, डॉ. सपना सुगंधा, डॉ.अल्का लल्हाल, डॉ. स्वाति कुमारी, कमलेश कुमार, डॉ. दिनेश व्यास, डॉ.पाथलोथ ओंकार, पीआरओ शेफालिका मिश्रा, सिस्टम एनालिस्ट दीपक दीनकर, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य मिश्रा समेत बड़ी संख्या शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी व देश के विभिन्न विवि के विद्वान ऑनलाइन उपस्थित रहे।


Thursday, June 4, 2020

संस्कृति, प्रकृति और प्रगति के अनुरुप हो शिक्षा व्यवस्था-अतुल कोठारी

 

केविवि और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ राष्ट्रीय वेबिनार

अतुल कोठारी रहे मुख्य वक्ता, प्रो.पी.एन मिश्र विशिष्ट अतिथि, प्रो. राजकुमार रहे मुख्य अतिथि

कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की अध्यक्षता, प्रबंधन विज्ञाव विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार रहे संयोजक
04 जून 2020.
किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था वहां की संस्कृति, प्रकृति और प्रगति के अनुरुप होनी चाहिए। प्रबंधन की भारतीय दृष्टि भारत ही नहीं पूरे विश्व के लिए उपयोगी है। आज पर्यावरण प्रबंधन में मनुष्य विफल रहा है जबकि आज से हजारों साल पहले ही हमारे मनिषियों द्वारा पर्यावरण के लिए मंत्र लिख दिया गया। भारतीय दृष्टि यह नहीं है कि समस्या खड़ी हो जाए तो हल ढूंढो, बल्कि भारतीय दृष्टिकोण यह है कि हम लोग पहले ही प्रबंधन कर लेते हैं। ये बातें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी ने महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता कही। रामायण और महाभारत जैसे धर्मग्रंथों व शिवाजी और चाणक्य के जीवन में प्रबंधन की चर्चा करते हुए कहा कि प्रबंधन के विद्यार्थियों को भगवान राम के जीवन को देखना चाहिए कि बिना पर्याप्त संसाधनों के उन्होंने महा बलशाली रावण और उसकी सेना को कैसे पराजित कर दिया? उन्होंने भगवान राम के जीवन चरित से सबको साथ लेकर चलने और ऊंच नीच का भेद-भाव न करने की सीख लेने का आह्वाहन किया।

“प्रबंध शिक्षा में भारतीय दृष्टि” विषय पर आयोजित इस सेमीनार में प्रबंध शिक्षा, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. पी.एन. मिश्र ने बतौर विशिष्ट अतिथि अपने संबोधन में कहा कि कोरोना संकट के आज की इस भयंकर प्रकृति में पूरी दुनिया वही करने की सिफारिश कर रही है जो भारतीय संस्कृति में पहले से समाई हुई है। बाहर से आने पर घर के दरवाजे पर ही चप्पल उतारना, पैर-हाथ और मुहं धोना, थोड़ा पानी अपने ऊपर छिड़क लेना,थोड़ा पानी पी लेना ये हमारी संस्कृति में समाहित रहा है जबकि दुनिया अब इसका महत्व समझ पा रही है। भारतीय शिक्षा के संबंध में कहा कि मैकाले ने जो हमसे छिना, उससे उबरने में हम अब तक कामयाब नहीं हो सके हैं। उन्होंने धर्मग्रंथों को प्रबंधन के पाठ्यक्रम में शामिल करने का आह्वाहन किया। स्थानीय स्तर पर प्रबंधन के बारे में कहा कि हम जिनके साथ रह रहे हैं, जिनके साथ काम कर रहे हैं उनके प्रबंधन के लिए क्या कर रहे हैं, यह हमें सोचना ही होगा, इसकी अनदेखी कर आप एक सफल प्रबंधक नहीं हो सकते।

वेबिनार के मुख्य अतिथि, पंजाब विवि, चण्डीगढ़ के कुलपति प्रो.राजकुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली में मानवीय पक्ष पर जोर दिया जाता है, जिसमें अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं को कम करने की बात की जाती है इसमें मानवीय पक्ष सामने आता है। मानवीय पक्ष को लेकर तमाम शोध पत्र और पुस्तके आई हैं। जबकि पाश्चात्य प्रणाली में उपभोग की बात ज्यादा होती है। भारतीय दृष्टि में प्रबंधन विज्ञान उतना ही पुराना है जितना अन्य हैं। हमारा मानना है कि हमारा प्रबंधन शास्त्र गीता पर आधारित है। जिसमें कहा जाता है कि कर्म ही पूजा है। भारतीय प्रबंधन में कर्तव्य की बात गीता से आई। हमारी संस्थाएं कहती है कि अपने प्रमोशन के बारे में चिंता मत करो, उसकी चिंता हम करेंगे। आप अपना कर्तव्य निभाईये।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में वेबिनार के मुख्य वक्ता अतुल कोठारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि आप शिक्षा के क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं उनसे हम सभी लोग परिचित भी हैं। सभी विद्वानों की बातों को रेखांकित करते हुए प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष से कहा कि इन सुझावों को आप प्रबंधन विज्ञान के पाठ्यक्रमों में शामिल कीजिये, विवि की तरफ से हर तरह की मदद की जाएगी। प्रो. शर्मा ने इस आयोजन में शामिल सभी वक्ताओं व सहभागियों का आभार जताते हुए वेबिनार के संयोजक एवं वाणिज्य एवं प्रबंधन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो.पवनेश कुमार की इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए सराहना की।

वेबिनार के संयोजक एवं संचालक प्रो. पवनेश कुमार ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिनः व अतिथि देवो भवः की रही है। हमारे मनिषियों द्वारा बताये गये अस्तेय व अपरिग्रह जैसे मार्गों पर चलने का विचार पूरे विश्व में हो रहा है। उन्होंने वेबिनार में सहभागी सभी वक्ताओं के व्यक्तित्व व कृतित्व की प्रशंसा की और उनके सुविचारों से सभी सहभागियों के लाभान्वित होने की बात कही।

इससे पूर्व वेबिनार के शुरुआत में सह-संयोजक प्रो. त्रिलोचन शर्मा ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का स्वागत किया और विषय के संबंध में संक्षेप में जानकारी दी। वेबिनार के सह-संयोजक डॉ.आशीष रंजन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस वेबिनार में केविवि के प्रो. राजीव कुमार, डॉ. सपना सुगंधा, डॉ.अल्का लल्हाल, कमलेश कुमार, डॉ. दिनेश व्यास, डॉ.पाथलोथ ओंकार, शेफालिका मिश्रा, दीपक दीनकर, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य मिश्रा समेत बड़ी संख्या शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी व देश के विभिन्न विवि के विद्वान ऑनलाइन उपस्थित रहे।

‘कोरोना संकट के बाद उभरते रुझान, चुनौतियां और अवसर’ विषय पर दो दिवसीय वेबिनार सम्पन्न

 


वेबिनार ने भौतिक संसाधनों की कमी को दूर किया, विशेषज्ञ, शिक्षक व विद्यार्थी कर रहे ज्ञान का आदान प्रदान- केविवि कुलपति

500 से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों व विशेषज्ञों ने की भागीदारी, आयोजन समिति में 50 से ज्यादा लोग रहे सक्रिय, 22 समानांतर सत्रों में करीब 350 शोध पत्रों की प्रस्तुति

प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.पवनेश कुमार ने किया संयोजन, कहा- आगे भी जारी रहेंगे वेबिनार, टीम वर्क पर दिया जोर

30-31 मई 2020
कोरोना एक त्रासदी ही नहीं है, अवसर भी है। इंसान की फितरत है कि वह बदलाव को सहज स्वीकार नहीं करता है। लेकिन परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है। हम बदलाव नहीं कर रहे हैं तो प्रकृति हमें इसके लिए मजबूर कर रही है। समय रहते हमें इसके लिए तैयार हो पड़ा। जो बात भारत की संस्कृति में समाई हुई है वह संकट के इस दौर में पूरी दुनिया के काम आ रही है। अब सोशल डिस्टेंसिंग की बात लोगों को समझ में आने लगी है। वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति विकसित हो रही है। इसके लिए हमें रिसर्च कल्चर भी डेवलप करने की आवश्यकता है। ये बातें महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रबंधन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित वेबिनार के उद्घाटन सत्र में बतौर विशेषज्ञ आईएमएस, गाजियाबाद के निदेशक प्रो. आलोक कुमार पाण्डेय ने कही। 

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि कोरोना की चुनौती को केविवि के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने स्वीकार करते हुए अकादमिक उत्कर्ष के कार्यों को आगे बढ़ाया है। वेबिनार के कारण हमें संसाधनों की कमी महसूस नहीं हो रही और बड़ी संख्या में विशेषज्ञ, शिक्षक और विद्यार्थी आपस में ज्ञान का आदान-प्रदान कर रहे हैं। वेबिनार के संयोजक व प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यूं तो विवि के लगभग सभी विभाग वेबिनार के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान कर रहे हैं लेकिन प्रो.पवनेश कुमार की अध्यक्षता में प्रबंधन विज्ञान विभाग वेबिनार आयोजित करने में सबसे आगे है। इसके लिए मैं इन्हें और विभाग के सभी शिक्षकों की प्रशंसा करता हूं साथ ही बधाई देता हूं।

मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, गुड़गांव के निदेशक प्रो. पवन कुमार सिंह ने अपने बीज वक्तव्य में वेबिनार के विषय को समय की आवश्यकता के अनुरुप बताया और प्रबंधन विज्ञान विभाग सहित पूरे केविवि परिवार की प्रशंसा की। वहीं वेबिनार के संयोजक व प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने कहा कि वेबिनार के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों के साथ-साथ देश के जाने माने विशेषज्ञों के साथ जुड़कर ज्ञान का आदान-प्रदान करने का अवसर मिल रहा है। इसके लिए उन्होंने विशेषज्ञों व विवि प्रशासन का आभार जताया और कहा कि आगे भी इस तरह के आयोजन होते रहेंगे। शिक्षकों व विद्यार्थियों की टीम भावना से काम करने को उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों की सफलता के लिए जरुरी बताते हुए अपने सभी सहयोगियों की प्रशंसा की।

इस वेबिनार के दोनों दिन कुल मिलाकर 22 समानांतर सत्रों में लगभग 350 प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किये। इन सत्रों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संयोजकों और सह संयोजको में डॉ. बी. सिंह, डॉ. अभिजीत विश्वास, डॉ.स्वाति कुमारी, डॉ. शांतनु सौरभ, डॉ.शिवेंद्र सिंह, डॉ.सुमिता सिंकु, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ.दिनेश व्यास, डॉ.अभय विक्रम सिंह, भगत सिंह कॉलेज के डॉ.हरनाम सिंह, राज.स्नातकोत्तर महाविद्यालय, झाँसी के डॉ. अरुण कुमार सोनकर, माखनलाल विवि के डॉ.आदित्य मिश्रा आदि शामिल रहे। करीब 500 प्रतिभागियों ने वेबिनार में हिस्सा लिया।

बीएयू के प्रो. एच.के.सिंह ने वेबिनार के पहले दिन तकनीकि सत्र की अध्यक्षता की, आर्यभट्ट कॉलेज,दिल्ली के डॉ. जे.के.सिंह सत्र के उपाध्यक्ष रहे, भारतीय वाणिज्य संघ के उपाध्यक्ष प्रो.मानस पाण्डेय बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे, प्रो. भगवान सिंह ने बीज वक्तव्य दिया। इस सत्र के संयोजक की भी भूमिका केविवि के प्रो. त्रिलोचन शर्मा ने निभाई, जबकि डॉ.स्वाति कुमारी ने सह-संयोजक की भूमिका निभाई। वहीं दूसरे और अंतिम दिन तकनीकि सत्र की अध्यक्षता प्रो. अविनाश डी. पाथिडिकर ने की, प्रो. विकास चौधरी उपाध्यक्ष रहे, प्रो.हरे कृष्णा सिंह, विशिष्ट अतिथि रहे, प्रो. वी.एस. सुंदरम ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। डॉ. आर.जयराम ने बीज वक्तव्य दिया। केविवि के डॉ. सुब्रत राय ने संयोजक की जबकि डॉ.अल्का लल्हाल ने सह-संयोजक की भूमिका निभाई।
विवि के ओएसडी प्रशासन डॉ. पद्माकर मिश्र, डी.आर. प्रो. ज्वाला प्रसाद व सच्चिदानंद सिंह, पीआरओ शेफालिका मिश्रा व सिस्टम एनालिस्ट दीपक दीनकर आदि ने इस आयोजन पर प्रसन्नता जताई। प्रबंधन विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर कमलेश कुमार, शोधार्थी सिद्धार्थ घोष, चंदनवीर, अंकिता आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समाचार लिखे जाने तक विवि के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में वेबिनार का समापन सत्र जारी था। इस सत्र में पाटलिपुत्र विवि, पटना के कुलपति प्रो.जी.सी.आर जायसवाल बतौर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि सौराष्ट्र विवि राजकोट के प्रो. आलोक चकरवाल व बीज वक्तव्य के लिए प्रो. सुजीत कुमार दुबे आमंत्रित रहे। जबकि इस सत्र का संयोजन केविवि की डॉ.सपना सुगंधा ने किया।

‘संकट से बचना है तो भारतीय परंपराओं का अनुकरण करना होगा’


 

केविवि में ‘आत्मनिर्भर भारतः अवसर एवं चुनौतियाँ’ विषय पर वेबिनार

पद्मश्री अशोक भगत, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो.टी.एन.सिंह, व आईआईएम लखनऊ के प्रो.धर्मेंद्र सिंह सेंगर ने दिया व्याख्यान

कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने की अध्यक्षता, प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.पवनेश कुमार रहे संयोजक
24 मई 2020
गांधी जी ने कहा था कि गांव के लोग गांव में ही रहें, स्थानीय कार्यों में संलग्न हों तो हम लोग विकास कर लेगें। लेकिन देश में औद्योगिकरण शुरु हुआ। उद्योगों के अमानवीय व्यवहार से लोग आज गांवों की ओर लौट रहे हैं। जो लोग लौट रहे हैं बहुत ही दयनीय ज़िंदगी जी रहे थे। इंसानों ने लालचवश प्रकृति का दोहन किया-शोषण किया तो प्रकृति ने भी बदला लिया और औकात बता दिया। हमें पुनः अपने मूल्यों की ओर लौटने की आवश्यकता है। तभी हम आत्मनिर्भर हो सकते हैं। देश के प्रधानमंत्री इसे महसूस कर रहे हैं और आत्मनिर्भर भारत के लिए कदम बढ़ाया है। लेकिन जो तंत्र है वह समर्पण के साथ सहयोग करे तो ही भारत आत्मनिर्भर होगा। ये बातें विकास भारती, बिशुनपुर, झारखंड के सचिव पद्मश्री अशोक भगत ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आत्मनिर्भर भारत: अवसर एवं चुनौतियाँ’ विषय पर आयोजित वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि कही।

वेबिनार के विशिष्ट अतिथि व महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टी.एन.सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज हम सभी लोग एक सुक्ष्म जीव के कारण लॉकडाउन हो गये हैं। दुनिया के बड़े-बड़े देश जो अपनी चौधराहट दिखाते थे, उन लोगों ने इसके आगे घुटने टेक दिये हैं। हम भारत के लोगों को भी अनेक तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है लेकिन भारत के लोगों के इरादे बहुत बड़े हैं। हम सभी भविष्य के भारत की चर्चा कर रहे हैं। आज इतनी बड़ी संख्या में जो लोग वापस घर आ रहे हैं। वे एक नये तरह की अनुभूति कर रहे हैं। ये लोग हमारी संपदा हैं। इनके ऊपर हमें गर्व करना चाहिए। गांधी जी का भी सपना था कि हर हाथ को काम मिले और जो जहां है वहीं काम मिले। गांधी जी की इच्छानुसार हर व्यक्ति स्वालंबी हो जाए तो समाधान हो सकता है। आज अगर कृषि योग्य भूमि घट रही है। फिर भी तकनीकि की मदद से हम लाभ उठा सकते हैं। जो चीजें हम दूसरी जगहों से खरीदते हैं, कोशिश होनी चाहिए आस-पास ही उसका उत्पादन हो। स्वालम्बन के लिए भारतीय चिंतन के अनुसार हमारे पास जो है उस पर स्वाभिमान होना चाहिए। उसका सकारात्मक ढंग से उपयोग करना चाहिए। आज पूरा विश्व भारत की तरफ देख रहा है। कोरोना को लेकर जो थोड़ी सी उम्मीद दिख रही है वह भारत से है। हमारे हर्बल उत्पादों में, आयुर्वेद में बहुत क्षमता है।  फार्मा सेक्टर में संभावना है। भारत समेत पूरे विश्व के आईटी सेक्टर के संचालन में भारतीयों का बहुत योगदान है। इसका केंद्र भारत बने तो अपार संभावनाएं हैं। प्रतिस्पर्धा का सामना करते हुए उत्पादन बढ़ाना होगा। वेंटिलेटर और मास्क हम नहीं बनाते थे। लेकिन इस दिशा में भी हमने मजबूती से कदम बढ़ा दिया है। हम लोग अपनी परंपराओं पर यकीन करें, उनका अनुसरण करें तो हम दुनिया को राह दिखा सकते हैं और आज हम लोग यह कर रहे हैं। भारत दुनिया के लोगों को हाथ जोड़कर अभिवादन करना सीखा रहा है। दुनिया को यही संदेश है कि संकट से बचना है तो भारतीय परंपराओं का अनुकरण करें। बाहर से घर आने पर हाथ-पैर धोने, चप्पल बाहर उतारने और कपड़े साफ करने जैसे काम आज संकट पड़ने पर किया जा रहा है वह काम भारत में पहले से होता आ रहा है। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हम आगे बढ़ सकते हैं।

वेबिनार के मुख्य वक्ता, आईआईएम लखनऊ के प्रो.धर्मेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में रहती है। गांव का युवक आत्मनिर्भर होगा तो भारत आत्मनिर्भर होगा। जितनी बड़ी महामारी होती है बचाव तंत्र भी उतना ही मजबूत होना चाहिए। भारत में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करना होगा और लोगों को इस पर विश्वास भी करना सीखाना होगा। जो निर्देश सरकार द्वारा दिये गये तबलीगी जमात के लोगों ने उस पर समय रहते विश्वास कर लिया होता तो कोरोना संकट के इस दौर में भी भारत में स्थिति दूसरी होती। आने वाले समय में क्लाइमेट चेंज के कारण वर्तमान संकट से भी बड़ी महामारी हो सकती है। इससे बचने के लिए हमें डिजिटल टेक्नॉलॉजी को मजबूत करना होगा। आगे कहा कि आज जो लोग शहरों से गांव लौट रहे हैं, उनके पास पैसा नहीं है! उनके गांव अगर उन्हें रोजगार देते तो वे जाते ही क्यों? वे गांव में लौटकर आ रहे हैं इसका मतलब है कि उन्हें अभी भी गांव पर विश्वास है। हम आत्मनिर्भर भारत की चर्चा कर रहे हैं। गांव का आदमी तभी आत्म निर्भर होगा जब उस पर भी कोई निर्भर हो जाए। गांव का आदमी अपने उद्यम व सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर इतना सशक्त हो जाए कि बाजार उस पर निर्भर हो जाए। इस विषय पर ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व एनजीओ के लोगों को जाकर चर्चा करनी चाहिए और रास्ता निकालना चाहिए।

विवि के कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में इस महत्वपूर्ण विषय पर व्याख्यान देने के लिए तीनों ही विद्वान वक्ताओं एवं देशभर से जुड़े सहभागियों की प्रसंशा की। प्रो.शर्मा ने आगे कहा कि वक्ताओं ने केवल सैद्धांतिक विषयों पर प्रकाश नहीं डाला बल्कि व्यवहारिक दृष्टि भी सामने रखी। प्रो.पवनेश कुमार व उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरु की गयी योजना पर इतनी सार्थक चर्चा कराने के लिए आभार जताया।

वेबिनार के संयोजक व प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि तीनों ही वक्ता अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। इन्होंने इतना सारगर्भित व सार्थक व्याख्यान दिया कि सहभागियों द्वारा उठाये गये सवालों के जवाब उसमें निहित है। प्रबंधन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ.अल्का लल्हाल ने वेबिनार का संचालन किया जबकि सहायक प्रोफेसर डॉ.स्वाति कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर केविवि की डॉ.सपना सुगंधा, प्रो. विकास पारीक, डॉ. दिनेश व्यास, कमलेश कुमार समेत माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य मिश्रा समेत केविवि व देश भर के अन्य विश्वविद्यालयों से बड़ी संख्या में शिक्षक व विद्यार्थियों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई।

केविवि के 10 विद्यार्थियों ने आईबीपीएस परीक्षा में लहराया परचम, बढ़ाया चम्पारण का गौरव

File Photo
पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक आदि राष्ट्रीयकृत बैंकों में विशेषज्ञ अधिकारी पद पर चयन

कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने जताई प्रसन्नता, कहा- अन्य विद्यार्थियों को मिलेगी प्रेरणा

प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.पवनेश कुमार ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को दिया श्रेय, कहा-आगे भी जारी रहेगा सफलता का सिलसिला
22 मई 2020
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यायल के प्रबंधन विज्ञान विभाग के 10 विद्यार्थियों ने बैंकिंग के क्षेत्र में प्रतिष्ठित आईबीपीएस परीक्षा में सफलता हासिलकर न सिर्फ अपना और अपने माता-पिता का बल्कि अपने शिक्षकों, विश्वविद्यालय और पूरे चम्पारण का गौरव बढ़ाया है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस परीज्ञा में प्रबंधन विज्ञान विभाग के 10 विद्यार्थियों ने लिखित परीक्षा पास की और सभी विद्यार्थी अंतिम रुप से चयनित होने में भी सफल रहे। ये बातें केविवि के प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने अपने विभाग के पूर्व छात्र-छात्राओं के राष्ट्रीयकृत बैंकों में विशेषज्ञ अधिकारी के पद पर चयन पर कही। इन विद्यार्थियों में नेहा कुमारी को बैंक ऑफ इंडिया, न्यूटन कुमार, प्रिया और मनीषा को पंजाब नेशनल बैंक, राजेश कुमार, राजेश कुमार रवि, स्वास्ति सहाय, विवेक कुमार गुप्ता व मिहिर मनोहर को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और मेघा को कॉर्पोरेशन बैंक के लिए चयनित किया गया है।

विद्यार्थियों की इस सफलता पर कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि प्रबंधन विज्ञान विभाग के विद्यार्थी स्थापना के बाद से ही लगातार सफलता के नये-नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। कई वर्तमान व पूर्व विद्यार्थियों ने यूजीसी नेट-जेआरएफ की परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। पूर्व विद्यार्थी देश के जाने-माने विवि में पीएचडी कर रहे हैं। कुछ पूर्व छात्राएं स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में बड़े पदों पर कार्य कर रही हैं और आज आईबीपीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिलकर कुल 10 विद्यार्थियों ने देश के राष्ट्रीयकृत बैंकों में सेवा का अवसर हासिल किया है। यह प्रबंधन विज्ञान विभाग समेत पूरे विश्वविद्यालय के लिए आनंद और गौरव का समय है। सफल विद्यार्थियों, उनके माता-पिता व शिक्षकों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि इस सफलता से विवि के अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी।

वहीं प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने कहा कि इस सफलता से हमें कोई आश्चर्य नहीं हुआ, अपार प्रसन्नता जरुर हुई। हमारे विद्यार्थी बहुत ही परिश्रमी व हर सफलता के योग्य हैं। विभाग के शिक्षक विद्यार्थियों को हर चुनौती के लिए तैयार करते हैं। इन्हें सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों व शिक्षकों को इस सफलता का श्रेय देते हुए कहा कि विभाग के अन्य विद्यार्थी भी अपने अग्रजों से प्रेरणा ले सकते हैं और अनुशासित ढंग से अध्ययन करते हुए अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। विभाग व विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उन्हें हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

इस अवसर पर विवि के ओएसडी प्रशासन डॉ. पद्माकर मिश्र, प्रभारी वित्त अधिकारी प्रो. विकास पारीक, उप कुलसचिव डॉ. ज्वाला प्रसाद व सच्चिदानंद सिंह, विभाग के प्रो. सुधीर कुमार साहू, सह प्रोफेसर डॉ.सपना सुगंधा, सहायक प्रोफेसर डॉ. अल्का लल्हाल, डॉ. स्वाति कुमारी, कमलेश कुमार, अरुण कुमार, विभाग के पूर्व शिक्षक व वर्तमान में बीएचयू में कार्यरत डॉ. अभिजीत विश्वास व पूर्व में विभाग से जुड़े रहे व वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉ.आदित्य मिश्रा समेत जनसम्पर्क अधिकारी शेफालिका मिश्रा, विश्वविद्यालय के सिस्टम एनालिस्ट दीपक दीनकर आदि अधिकारियों व शिक्षकों ने सभी सफल विद्यार्थियों व उनके परिवार को बधाई दी। इस सफलता से पूरे विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष व उत्साह का वातावरण है।

समृद्ध जीवन की बजाय संतुष्टिपूर्ण जीवन का आह्वाहन



भारतीय अर्थव्यवस्थाः कोविड-19 के बाद चुनौतियां व अवसर’ विषय पर वेबिनार में विशेषज्ञों ने रखे विचार

बीएचयू के प्रो.एच.पी. माथुर, पीएनबी के सुनील अग्रवाल व वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने दिया व्याख्यान

केविवि कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने की अध्यक्षता, प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार रहे संयोजक

16 मई 2020
कोविड-19 एक विश्वव्यापी संकट है। लॉकडाउन की वजह से कंपनियों में मैनुफैक्चरिंग नहीं हुई है। पहले से जो तैयार माल था उसकी बिक्री नहीं हुई। अगर सप्लाई नहीं होगी तो कोई भी कंपनी काम नहीं कर सकती है। लोगों की नौकरियां चली गयी हैं। जिनके हाथ में नौकरी है उनमें से भी बड़ी संख्या में लोगों की सैलरी कम हुई। लोग केवल जरुरी सामान खरीद रहे हैं। इससे डिमांड पर असर पड़ा है। भारत डायमंड, सीफूड, पेट्रो प्रोडक्ट, ज्वैलरी आदि चाइना को भेजता था। बाकि देशों में भी माल जाता था, वहां से भी नकारात्मक असर आया है। संकट की इस घड़ी में भी भारत के पास अवसर है। हमें शार्ट समय के लिए भी और लम्बी दौड़ के लिए भी योजना बनानी होगी। भारत में आउटसोर्सिंग हब व मैन्यूफैक्चरिंग हब तैयार करना होगा। एजुकेशन सेक्टर ऑनलाइन होने जा रहा है। डिस्टेंस एजुकेशन के क्षेत्र में बड़ा अवसर हैं। हमें परिस्थिति को समझते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उपरोक्त बातें काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रबंधन विज्ञान संस्थान के प्रो.एच.पी. माथुर ने महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रबंधन विज्ञान विभाग द्वारा ‘भारतीय अर्थव्यवस्थाः कोविड-19 के बाद चुनौतियां व अवसर’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कही।

इससे पूर्व केविवि कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रबंधन विज्ञान विभाग द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार वेबिनार आयोजित करने की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह स्वयं विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इन आयोजनों के कारण उन्हें भी कुछ नया जानने-सुनने का अवसर मिलता है। कोरोना संकट के बीच उद्योगों के भारत आने की संभावना पर सवालिया अंदाज में कहा कि यह एक गंभीर विषय है। हमें सोचना पड़ेगा कि इसका उल्लास मनाना है या सचेत रहने आवश्यकता है? अपने संक्षिप्त संबोधन के अंत में उन्होंने वेबिनार के सभी सहभागियों का स्वागत करते हुए उन्होंने सभी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं दी।

पंजाब नेशनल बैंक, नई दिल्ली के मुख्य प्रशिक्षण अधिकारी सुनील अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि निश्चित तौर पर संकट बड़ा है। इस समय हमें संभलकर आगे बढ़ना है। हमारी अर्थव्यवस्था बिल्कुल कमजोर नहीं हुई है, धीमी हो गयी है। सरकार द्वारा टैक्स कलेक्शन अचानक से कम हो गये हैं, खर्चे बढ़ गये हैं। हम ‘जान है तो जहान है’ से ’जान भी जहान भी’ पर आ गये हैं। इसके बाद अब जिम्मेदारी उद्योग जगत पर आ गयी है। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना से आने वाले समय में लोगों को लाभ मिल सकता है। हमारी समस्या पापुलेशन मैनेजमेंट का न होना भी है। एक राज्य के लोग दूसरे राज्य में कितनी संख्या में हैं, क्या कर रहे हैं? इस संबंध में डेटा की आवश्यकता है। लोगों के रोजगार छूट गये हैं। लोगों के पास पैसा नहीं होगा तो खर्च नहीं करेंगे। डिमांड नहीं होगी तो प्रोडक्शन नहीं होगा। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार ने 20 लाख करोड़ का पैकेज दिया है। बैंकर्स को इसे समझना होगा। जनता तक लोन पहुंचेगा तो लिक्विडिटी बढ़ेगी। शहरों से लोग गांवों में जा रहे हैं। गांवों में विकास और डिजिटलाईज करने की आवश्यकता है। वक्त की मांग है कि हम समृद्ध जीवन की बजाय संतुष्टिपूर्ण व्यवस्था की ओर जाएं।

द हिंदू बिजनेस लाइन के वरिष्ठ सहायक संपादक शिशिर सिन्हा ने अपने वक्तव्य में कहा कि राज्य सरकारों के सामने सवाल है कि संसाधन कहां से आएगा। उनके जिम्मे कुछ खर्च ऐसे होते हैं, जिन्हें वे रोक नहीं सकते। ऐसे में शराब बिक्री से पैसा अर्जित करना एक विकल्प है। कई राज्यों में शराब की बिक्री शुरु हुई तो सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ गईं। होम डिलिवरी बेहतर विकल्प नज़र आया। राज्य सरकारों के ऊपर जब अतिरिक्त कमाई की बात आएगी तो शराब की ओर जा सकते हैं।
वेबिनार के संयोजक व प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.पवनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि सहभागियों की तरफ से पूछे गये सवालों की संख्या बता रही है कि वक्ताओं का व्याख्यान अत्यंत ज्ञानप्रद था और लोगों ने बहुत ध्यान से सुना। उन्होंने अत्यंत ही कम समय की सूचना के बावजूद सहजता से वेबिनार में सहभागी होने के लिए सभी वक्ताओं का आभार जताया। प्रबंधन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर व वेबिनार की आयोजन सचिव डॉ. स्वाति कुमारी ने कार्यक्रम का संचालन किया। आयोजन सचिव डॉ. अल्का लल्हाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्रो. सुधीर कुमार साहू, सह-संयोजक रहे जबकि सह प्रोफेसर डॉ.सपना सुगंधा ने आयोजन सचिव का दायित्व निभाया। केविवि के प्रो.राजीव कुमार, कमलेश कुमार, डॉ.दिनेश व्यास, डॉ.ओमप्रकाश गुप्ता, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य कुमार मिश्रा आदि शिक्षक व बड़ी संख्या में विद्यार्थी ऑनलाइन उपस्थित रहे।

Thursday, May 14, 2020

प्रबंधन विज्ञान विभाग ने ऑनलाइन कराया पूर्व छात्र सम्मेलन


*पूर्व विद्यार्थियों ने विभागाध्यक्ष समेत विभाग के शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय*

*कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने पूर्व विद्यार्थियों की राय को केविवि के लिए बताया उपयोगी*

*प्रो. पवनेश कुमार, प्रो.सुधीर कुमार साहू, डॉ. सपना सुगंधा,डॉ.अल्का लल्हाल व कमलेश कुमार आदि शिक्षकों समेत बड़ी संख्या में पूर्व विद्यार्थियों ने की सहभागिता*

(13 मई 2020)
पढ़ाई के दौरान हमें हमारे शिक्षकों का पूरा साथ मिला। हमारे शिक्षक व्यक्तिगततौर पर एक-एक विद्यार्थी की कमजोरियों और ताकत पर ध्यान दिलाते थे। हमें एमबीए की पढ़ाई के दौरान कोर्स के अलावा पर्सनॉलिटी डेवलपमेंट की ओर ध्यान दिलाया गया। कैम्पस प्लेसमेंट से पहले तैयारी का समय हमारे लिए सीखने का बेहतरीन मौका होता था। मुझे याद है जब कैम्पस प्लेसमेंट में बापूधाम मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड में मेरा चयन नहीं हुआ तो मैं बहुत नर्वस थी। मेरे विभागाध्यक्ष मुझसे कहते थे कि तुम चिंता मत करो, आगे की तैयारी करो। तुम्हें इससे भी अच्छी जगह नौकरी मिलेगी। आगे चलकर ये बात बिल्कुल सही साबित हुई। कुछ ही समय बाद मेरे पास एक साथ 4 नौकरियों का ऑफर था। बताते हुए खुशी हो रही है कि आज मैं छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्टील अथॉरिटी इंडिया लिमिटेड में काम कर रही हूं। मेरी इस सफलता का श्रेय मेरे शिक्षकों व केविवि को जाता है। ये बातें महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रबंधन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित ऑनलाइन पूर्व छात्र सम्मेलन के दौरान सत्र 2017-19 की पूर्व छात्रा सुष्मिता पाटला ने कही।

इससे पूर्व विवि के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में इस आयोजन पर प्रसन्नता ज़ाहिर करते हुए प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष एवं शिक्षकों की प्रशंसा की। प्रो. शर्मा ने कहा कि पूर्व विद्यार्थियों की राय किसी भी विश्वविद्यालय के विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है। प्रबंधन विभाग के पूर्व विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।                                                                                                                                                                             

2017-19 बैच की पूर्व छात्रा मनीषा कुमारी ने कहा कि मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि केविवि के प्रबंधन विज्ञान विभाग में पढ़ने का अवसर मिला। इससे पूर्व मैंने जहां से स्नातक किया था वहां विद्यार्थियों और अध्यापकों के बीच एक गैप रहता था। जबकि यहां शिक्षकों से हम सभी का भरपूर इंट्रैक्शन हुआ। पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास का अवसर मिला। मेरी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी हो गयी। मैंने यूजीसी-जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और वर्तमान में मैं सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हूं। मैं जो कुछ भी कर पा रही हूं उसका श्रेय मेरे शिक्षकों को जाता है। उम्मीद है कि मैं सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल कर आप सभी को गर्व का अवसर दूंगी।
अप्पू कुमार नाम के पूर्व छात्र ने कहा कि एमबीए की पढ़ाई के दौरान हमें सैद्धांतिक के साथ-साथ जो व्यवहारिक ज्ञान हासिल हुआ वह हमारे लिए बहुत ही लाभदायक साबित हुआ। मैंने जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्तमान में मैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहा हूं। अपने जूनियर साथियों से कहना चाहूंगा कि टेक्नॉलॉजी से रिलेटेड करिकुलम एक्टिविटी करें। शिक्षकों को भरपूर सम्मान देते हुए उनके निर्देशों का पालन करें। सफलता आपके कदम चुमेगी।

अनु कुमारी ने कहा कि केविवि के प्रबंधन विज्ञान विभाग से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। आज मैं राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में मैनेजमेंट ट्रेनी पद पर कार्यरत हूं। अच्छी ट्रेनिंग के लिए मैं अपने विभागाध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार समेत सभी शिक्षकों का धन्यवाद देती हूं।
2016-18 बैच के न्यूटन ने कहा कि प्रबंधन विज्ञान विभाग में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने समस्ता कंपनी में काम किया। उसके बाद मेरा रुझान थोड़ा बदला और मैं आईबीपीएस द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल हुआ। इसके अलावा भी मैंने कुछ अन्य सरकारी नौकरी के लिए प्रयास किया। परिणाम का इंतजार कर रहा हूं। उम्मीद है कि मैं सफलता हासिल करुंगा। जूनियर साथियों से कहूंगा कि लगन के साथ शिक्षकों के मार्गदर्शन के अनुसार अपनी पढ़ाई और भविष्य की तैयारी करें। नकारात्मक सोच वालों से दूर रहें।
सूरज आनंद ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फ्लिप कार्ट कम्पनी में काम किया। वहां अच्छा अनुभव मिला, उसके बाद खुद का बिजनेस शुरु किया। पढ़ाई के दौरान शिक्षकों ने सीखाया कि जो करना है अभी तय कर लो, बाद में पछताना मत। मुझे खुशी है कि शिक्षकों की बात मेरे काम आई। मैं आज आत्मनिर्भर हूं। मैं आप सभी से कहूंगा कि केवल जॉब के भरोसे मत बैठिये। खुद का बिजनेश शुरु किजिये, आत्मनिर्भर बनिये।
श्याम मनोहर मिश्र ने बताया कि पढ़ाई के दौरान हमें बहुत बढ़ियां ट्रेनिंग मिली। मैं वर्तमान में यूनियन बैंक में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत हूं। लॉकडाउन के दौरान मुझे अपने बैंक में मुझे सोशल डिस्टेंसिंग इंचार्ज बनाया गया है। यह हमारी ट्रेनिंग की ही देन है कि कठिन परिस्थिति में भी मैं बेहतर ढंग से काम कर पा रहा हूं। जूनियर साथियों से कहना चाहूंगा कि खूब मेहनत कीजिये। जहां भी इंटर्न का मौका मिले, जी-जान से काम कीजिये। काम से भागिये मत वर्ना एक दिन काम आपसे दूर हो जाएगा।
सोनम ने बताया कि शुरु में वह एक सामान्य विद्यार्थी थीं। एमबीए की पढ़ाई के दौरान उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आया। वर्तमान में वह एसआईएस, पटना में एचआर एक्जिक्यूटिव के पद पर काम कर रही हैं। अगर केविवि के प्रबंधन विभाग में पढ़ने का अवसर न मिलता तो यह कर पाना उनके लिए संभव नहीं था। पटना में अपने परिवार से दूर रहकर भी सफलतापूर्वक व अपनी ड्यूटी को निभा रही हैं। इसका श्रेय उन्होंने केविवि के प्रबंधन विभाग को दिया और इसके लिए अपने सभी शिक्षकों का आभार जताया।
मिहिर मनोहर ने बताया कि वह केविवि से एमबीए करने के बाद इसी विवि में यूडीसी के पद पर काम कर रहे हैं। ज्वाइनिंग के समय उन्हें उनके विभागाध्यक्ष ने कुछ कड़वी सीख दी थी, जिसे उन्होंने सकारात्मक ढंग से लिया और बहुत जल्द यूजीसी की जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण कर लिया। जूनियर साथियों से उन्होंने कहा कि शिक्षकों के डांट का कभी बुरा नहीं मानना चाहिए।  2017-19 बैच की मेघा सिन्हा ने कहा कि केविवि के प्रबंधन विज्ञान विभाग से पढ़ाई पूरी करना सौभाग्य की बात है। एमबीए के अंतिम सेमेस्टर में बापूधाम मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड में नौकरी करने के दौरान उनका कुछ समय वहां निकल गया। वह सोचती हैं कि काश वह समय उन्हें मिल जाता। सभी शिक्षक बच्चों को व्यक्तिगत तौर पर ध्यान देते हैं। अच्छी ट्रेनिंग के लिए सभी शिक्षकों का उन्होंने आभार जताया।

इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.पवनेश कुमार ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने वर्ष में दो बार इस तरह के आयोजन कराने का बात कही। उन्होंने विवि के कुलपति प्रो.शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि विद्यार्थियों की हौसलाफजाई के लिए वे बड़ी ही सहजता से उपलब्ध हो जाते हैं। अन्य विवि में कुलपति से मिलना आसान नहीं होता। सभी विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि एमबीए में दी गई ट्रेनिंग आपके काम आ रही है। आप जहां भी हैं उसे शुरुआत मानिये, इसे बहुत बड़ा अचीवमेंट मानकर रुक मत जाइये। एक आईपीएस व आईएफएस अधिकारी का उदाहरण देते हुए बताया कि सफलता के लिए जूनून का होना जरुरी है। जूनून की कमी से ही कई बार हम सफलता के करीब पहुंचकर भी उसका स्वाद चखने से चूक जाते हैं।
प्रबंधन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ.अल्का लल्हान ने कार्यक्रम का संचालन किया और बीच-बीच में कई रोचक अनुभवों को साझा किया। प्रो. सुधीर कुमार साहू, सह प्रोफेसर डॉ.सपना सुगंधा, डॉ. स्वाति कुमारी, कमलेश कुमार, प्रो. विकास पारीक, आदि शिक्षकों व पूर्व में विभाग में कार्यरत डॉ. अभिजीत विश्वास, डॉ.आदित्य कुमार मिश्रा समेत बड़ी संख्या में पूर्व व वर्तमान विद्यार्थी ऑनलाइन उपस्थित रहे।

सूचना प्रदाता ही नहीं, चरित्र निर्माता भी हैं शिक्षक


‘ई-लर्निंगः चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर वेबिनार में विशेषज्ञों ने रखे विचार

*प्रो.आलोक कुमार चक्रवाल, प्रो.डी.बी. सिंह, प्रो.बिजय भुजबल व प्रो.रिपुदमन गौर ने दिया व्याख्यान*

*केविवि कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा रहे संरक्षक, प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने की अध्यक्षता*
(12 मई 2020)
महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘ई-लर्निंगः चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, गुजरात के वाणिज्य एवं व्यापार प्रबंधन विभाग के प्रो.आलोक कुमार चक्रवाल ने प्रथम विशेषज्ञ के तौर पर अपने संबोधन में कहा कि निश्चित तौर पर यह समय चुनौती भरा है लेकिन यह हमारे लिए बहुत बड़ा अवसर भी है। भारत के संदर्भ में कहा कि सूचना एवं संचार क्रांति के इस दौर में सीखने और सीखाने की स्थिति बहुत अच्छी है। हम भारतीय बहुत तेजी से सीखने की क्षमता रखते हैं। कुछ तकनीकी समस्याएं जरुर सामने आती हैं। कुछ स्थानों पर बिजली की समस्या रहती है इसके बावजूद हम बहुत तेजी से आगे बढ़ने जा रहे हैं। ई-लर्निंग का भविष्य बहुत उज्जवल है। पिछले 50 दिनों में हमने देखा कि किस तरह हम ऑनलाइन लर्निंग के अभ्यास कर रहे हैं और सफल हो रहे हैं। विद्यार्थियों को ई-लर्निंग के लिए उत्साह बनाए रखने के लिए कहा कि शिक्षकों को बेस्ट स्टडी मैटेरियल उपलब्ध कराना होगा। पूरी एनर्जी के साथ उनसे जुड़ना पड़ेगा और अपने आउटडेटेड नॉलेज से बाहर आना पड़ेगा।

इससे पूर्व वेबिनार के संरक्षक, विवि के कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि लॉकडाउन जैसी व्यवस्था में जो कुछ भी नया-सृजनात्मक किया जा सकता है केविवि में किया जा रहा है। वेबिनार का महत्व बताते हुए कहा कि यह किसी एक विषय से संबंधित नहीं है बल्कि उच्च शिक्षा के सभी आयामों से संबंधित है। उन्होंने आह्वाहन किया कि उच्च शिक्षा में विद्वानों को ई-माध्यमों से जोड़कर, उनके विचारों को और अधिक फैलाएं, जिससे चर्चा आगे बढ़े। वेबिनार में 150 से ज्यादा लोगों के जुड़ने पर प्रसन्नता जताते हुए वेबिनार के संयोजक व प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार व विभाग के सभी शिक्षकों की सराहना की। आगे कहा कि वर्तमान परिस्थिति में विवि के शिक्षकों ने सकारात्मक और सार्थक मार्ग चुनने का काम किया है।

वहीं राजर्षि प्रबंध एवं तकनीकी संस्थान, वाराणसी के निदेशक प्रो.डी.बी. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में हम जो कुछ कर रहे हैं यह हमारी प्रतिक्रिया है। हम ई-लर्निंग की तरफ जा रहे हैं यह च्वाइस का मामला नहीं है। समय के अनुसार हमें अपने माइंडसेट को चेंज करने की आवश्यकता है। ई-लर्निंग के बारे में कहा कि लॉकडाउन से पहले भी ई-लर्निंग का महत्व था, लॉकडाउन के दौरान भी इसका महत्व है और बाद में भी ऑनलाइन लर्निंग का महत्व रहेगा। आगे कहा कि ई-लर्निंग को सफल बनाने में अनुशासन का होना जरुरी है। उसके बिना यह प्रणाली सार्थक नहीं है।

सेंचुरियन तकनीकी एवं प्रबंधन विश्वविद्यालय, उड़ीसा के प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रो. बिजय भुजबल ने ई-लर्निंग को समय की मांग बताते हुए कहा कि आज अध्ययन-अध्यापन के लिए कई ऐप हैं। ई-लर्निंग का अधिकतम लाभ लेने के लिए शिक्षकों को अभिनव प्रयोग करने होंगे और बच्चों को इंगेज रखना होगा। बच्चे अलग-अलग भौगोलिक परिवेश से आते हैं। सबकी क्षमता एवं रुचि को समझकर ही अध्यापन किया जा सकता है। उन्होंने टीचिंग को एक्टिंग की तरह बताते हुए अध्यापकों से अपने पेशे में परफारमेंस देने की बात कही।

वहीं जीएल बजाज प्रबंधन एवं तकनीकी संस्थान, ग्रेडर नोएडा के प्रो.रिपुदमन गौर ने अपने वक्तव्य में कहा कि एक समय था जब मोबाइल को विवि में बंद किये जाते थे और आज ऐसा समय आ गया है कि मोबाइल से ही विवि चल रहे हैं। इस तकनीकी से तालमेल बैठाना होगा। जिस तरह से हम तेजी से ई-लर्निंग की तरफ शिफ्ट हुए हैं, उसी तरह हमें बच्चों को दिये जा रहे स्टडी मैटेरियल को भी समयानुकुल करना होगा। आगे कहा कि टीचर केवल इनफार्मेशन प्रोवाइड नहीं करता, चरित्र भी निर्माण करता है। अध्यापकों की जिम्मेदारी कहीं ज्यादा है। जब आप ई लर्निंग की तरफ जा रहे हैं तो इंटरैक्शन का तरीका विकसित करना होगा। आपको लर्नर के समझने का तरीका व क्षमता मालूम होना चाहिए। अध्यापक टीवी की तरह नहीं बोल सकते। हमें 50 मिनट लेक्चर देने की आदत बनी हुई है। स्टूडेंट के व्यवहार एवं आवश्यकता को देखते हुए इसे मिनिमाइज करना पडेगा। 50 मिनट से हमें लेक्चर का पीरियड 30 मिनट करना होगा। अध्यापकों को अपने कम्फोर्ट जोन से बाहर आकर बच्चों की उनकी रुचि के अनुसार इंगेज करना होगा। तभी हम ई-लर्निंग का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।

वेबिनार के अध्यक्ष व प्रबंधन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवनेश कुमार ने कहा कि बहुत ही खुशी की बात है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों व विवि से 150 से ज्यादा लोग सहभागिता कर रहे हैं। सभी व्याख्याता अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। इनके वक्तव्यों से शिक्षकों व विद्यार्थियों दोनों को बहुत लाभ मिलेगा।  वेबिनार की संयोजक सह-प्रोफेसर सपना सुगंधा ने कार्यक्रम का संचालन किया। वहीं सहायक प्रोफेसर डॉ. स्वाति कुमारी ने सभी व्याख्याताओं व सहभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस वेबिनार में केविवि के प्रो.राजीव कुमार, प्रो. अजय कुमार गुप्ता, प्रो. सुधीर कुमार साहू, डॉ. दिनेश व्यास, कमलेश कुमार व माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य कुमार मिश्रा समेत बड़ी संख्या में शिक्षकों व विद्यार्थियों ने उपस्थिति दर्ज कराई।